Editorial Vol. VII

Parcham wishes everyone an Inqalabi May Day! History of May Day takes us back to 1886 when workers protested the inhumane conditions of work and the struggle brought about laws to protect workers from exploitation. India, imagined as a socialist country by those who had fought for its freedom made provisions for guaranteeing workers rights … Continue reading Editorial Vol. VII

मजदूर दिवस

पहली बात मैं आपको बता दूँ, मजदूर का मतलब गरीब से ही नहीं होता है। जो व्यक्ति किसी भी संस्था या निजी के लिए काम करता है और बदले में मेहनताना (पैसे) लेता है, वह मजदूर है। मजदूर वह इकाई है जो हर सफलता का अभिअंग होता है। फिर चाहे वह इंटगारे में सना इंसान … Continue reading मजदूर दिवस

मुसलमान और शिक्षा

2011 की जनगणना के अनुसार, भारत का हर चौथा भिखारी मुसलमान है।  भारत में सबसे अधिक अनपढ़ भी मुस्लिम ही है। लेकिन क्यों? भारत के जो मुसलमान हैं वह अपने दीन और दुनिया की जो तालीम है उसमें  बराबरी नहीं ला पाते हैं इसीलिए वह लोग शिक्षा बीच में ही छोड़ देते हैं या फिर … Continue reading मुसलमान और शिक्षा

” मजदूर “

"मजदूर को करोना क्या मारेगा..मजदूर को जीने की मजबूरी मार डालेगी..              मानवीय शक्ति के द्वारा जिसमें शारीरिक बल, दिमागी कार्य और प्रयासों से जो कार्य किया जाता है उसे ही मजदूर  कहते हैं।              हमारे देश के गरीब मजदूर के हालत से तो आप सभी वाकिफ ही होंगे. मजदुर की परिभाषा क्या है? दुःख, … Continue reading ” मजदूर “

शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी

देखा जाए तो मुस्लिम महिलाएँ सामाजिक और आर्थिक रूप से इतनी बुरी हालत में है कि यह समाजिक और आर्थिक रूप से ओबीसी वर्ग से भी काफी पीछे और निचले स्तर पर आके खड़ी है। (https://hi.wikipedia.org )  इनकी गणना और भागीदारी का प्रतिशत बहुत ही निराशाजनक है।  भारत में भारतीय संविधान के अनुसार प्राथमिक स्तर … Continue reading शिक्षा के क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी

Discrimination with Muslim at Work Place, in the country

Discrimination of various forms such gender discrimination, sexual orientation, disability discrimination, ST/SC class discriminations, racial discriminations and the like exist in almost all society. However discriminations, if openly practiced by individuals/institutions are to be held as unlawful. Indian Constitution guarantees equality to every individual citizen of the country. Thus, if any individual/institution is found to … Continue reading Discrimination with Muslim at Work Place, in the country

Muslim Aurton Ki Kamaayi Haraam Hai!

Muslim aurton ki kamaayi haraam hai Aisa dekha gaya hai ki har ek musalman ke thoughts alag alag hai. Religion ka interpretation alag alag hai. Sabhi ki apni apni raay hai aurton ki kamaayi ko lekar. Koi kehta hai haraam hai, to koi kehta hai ke Shauhar se puch kar sharia mein rehkar kare toh halaal … Continue reading Muslim Aurton Ki Kamaayi Haraam Hai!

Introduction to Waqf and it’s potential for Community benefit

Introduction to WAQF Waqf is an alienable charitable endowment under Islamic law. It involves donating a building, plot of land or other assets for muslim religious and charitable purposes with no intention of reclaiming the assets. The returns from the waqf properties are used to finance educational institute (Madarasa), Graveyards,mosques and shelter home etc. Any … Continue reading Introduction to Waqf and it’s potential for Community benefit

Being Muslim at the Workplace

Our workplaces, like all aspects of the society we live in, are riddled with social hierarchies in addition to those imposed by management styles. Our social position determines how we experience the workplace. Movements such as MeToo have visibilized how gender-based discrimination operates at the workplace and the various incidents of harassment of SC/ST/OBC students, … Continue reading Being Muslim at the Workplace

मजदूर हैँ मजबूर ??

मजदूर हैँ मजबूर??खुद से पहले सोचता वो अपने परिवार के लिए।10_12 घंटे काम करता वो अपने घर के अमन और मुस्कान के लिए ।वो अपना घर छोड़ देता हैं कमाने के लिए।वो मजदूर ही होता है जमाने के लिए ।जिस दिन मनाते है सब छुट्टी उसके नाम पर,उस दिन भी तैयार होती है वो कमाने … Continue reading मजदूर हैँ मजबूर ??

اسلامی تعلیمات میں جنسی مساوات کا تصور

- بقول شا عر بیٹوں کے ہر محاذ  پے آگے ہیں بٹیاں نہ جانے کون مفت میں بدنام کر گیا  آج کا ہمارا معاشرہ جو لڑکوں کو لڑکیوں پر فوقیت دیتا ہے جو لڑکوں اور لڑکیوں میں بھید بھاؤ کرتا ہے جو لڑکوں کے پیدا ہونے پر خوشی کا ماحول اور لڑکیوں کے پیدا ہونے پر … Continue reading اسلامی تعلیمات میں جنسی مساوات کا تصور

मजदूर और लॉकडाउन

अपना सब कुछ छोड़ जो आए थे कभीउन्हें खाली हाथ ही लौटना पड़ा अपने पाव से । कुछ उमीद और जज्बा लिए वोखाली हाथ ही तो निकले थे अपने गांव से । जो क़दम निकले थे कभी सहर की तरक्की देखवो आज लौट रहे है मेरे गाव की छाव में।ऐसा नहीं ह के महामारी गांव … Continue reading मजदूर और लॉकडाउन

Editorial Vol. VI

Parcham wishes everyone an Inqualabi Women’s Day. Even as COVID has been a dampener on Women’s day celebrations, the need to celebrate and visibilise this day remains as important as ever. Pandemic or not, fascist forces have been relentless in the assault on democracy and human rights. We’ve had a direct assault by the State … Continue reading Editorial Vol. VI

Jashn e Pyaar – Celebrating Love

~ Written by Muskaan Sayed The Uttar Pradesh Prohibition of Unlawful Religious Conversion Ordinance, 2020 is  unofficially referred to as the 'love jihad law'. The Uttar Pradesh state cabinet cleared the ordinance on 24 November 2020 following which it was approved and signed by state Governor Anandiben Patel on 28 November 2020. As the law … Continue reading Jashn e Pyaar – Celebrating Love

नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और किसान बिल के आंदोलन।

~ Written by Afsar आंदोलन का  उद्देश्य सत्ता या व्यवस्था में सुधार या परिवर्तन होता है। आज का माहौल देख कर ऐसा लग रहा है कि  लोकतंत्र नहीं राजतंत्र है। जो जनता के राय के बिना कोई भी कानून पास किए जाए रहे है। चाहे नागरिकता संशोधन बिल हो या फिर किसान बिल। जब लोग … Continue reading नागरिकता (संशोधन) अधिनियम और किसान बिल के आंदोलन।

کیا وقف بورڈ سے واقف ہیں آپ ؟

  عجب نہیں کہ پریشاں ہے گفتگومیری موجودہ حالات کو مدِّنظر رکھتے ہوۓ بہت ہی افسوس سے کہنا پڑتا ہیکہ دن بدن مسلمان قوم پستی کی طرف جارہی ہے۔ وہ مسلمان قوم جو ہر طبقہ میں سب سے بہترمانی جاتی تھی جس نے ہر دور میں اپنی ترقّی کے لیے سوچا اسکی ایک مثال وقف ہے۔   … Continue reading کیا وقف بورڈ سے واقف ہیں آپ ؟

Access to Public Space

~ Written by Mateen Ansari As from the name it is clear that we are going to talk about “Public Space”. So thinking about this the first question that comes to the mind is does all the public in the society gets access to public space? Does both male and female get equal rights on … Continue reading Access to Public Space

बेटियाँ

~Written by Umera पहले की ये सोच गलत थी जहाँ बेटियों को बोझ समझा जाता था। उनके जन्म के समय ही उनकी शादी की जिम्मेदारियों के बारे में सोचा जाने लगता था। पहले लोगों की सोच थी के अगर लड़का पैदा होगा तो उनके खानदान को आगे बढ़ाएगा और लड़की नाक कटवा देगी। माँ को … Continue reading बेटियाँ

इस्लाम और औरत

~Written by Noorsaba जिंदगी तुझे जीने का सलीका हम ने नजर अंदाज करके ही सीखा।कभी कभी लोगों को, कभी बातों को, कभी अपने ही हालातों को। इस्लाम धर्म में लड़कियों को और औरतों को बहुत सारे अधिकार और इज्जत दी गई है।  लेकिन जो अपने आप को धर्म के रखवाले कहते हैं वही इस्लाम धर्म … Continue reading इस्लाम और औरत

Muslim Women Community of Education

~ Written by Gulaksha आज के समय मुस्लिम आबादी 14.2% है । जिसमें से 4% मुस्लिम graduation  किए हैं । मगर सबसे बड़ी बात यह सोचने की है 4% मुस्लिम ग्रेजुएशन किए है । इस्लाम में तो ज्ञान को सबसे ऊंचा रखा गया है । इस आंकड़े से यह पता चलता है कि मुस्लिम शिक्षा … Continue reading Muslim Women Community of Education

Unequal Access of Public Spaces

~ Written by Salma Ansari I love to travel and I have travelled alone many times. I would like to share with you the most recent experience of mine while I was in Goa. I was at the beach at night waiting for the cab to travel back to my hotel. It was almost midnight. … Continue reading Unequal Access of Public Spaces

ज़माना

ज़माना अक्सर आशिकों का साथ नही देता ये मालूम हैमगर यह भी तो हकीकत हैज़माने ने कई बार इश्क की दासतां सुनी है कई बार आशिक और माशुक के लिए  एक दर खुला रखा हैइन गज़ल उनकी कहानी पर लिखी हैएक शेर उनके अहसास पर अर्ज किया हैपेड़ पर बैठे दो परिंदे है यह तोकह … Continue reading ज़माना

भेटले जेव्हा त्याला

सांगते आज तुम्हाला त्या दिवशी काय झाले ?वाटले जाऊ कुठे तरी आणि तयार व्हायला गेलेछान ड्रेस घातलेआणि निघाले जायलाशृंगार पाहून स्वतःचाउगाच मनात लाजलेमग भानावर आलेचला निघाचंय आता असं म्हणतघराबाहेर पडलेबघता बघता खूप लांब निघून आले होतेकुठे आले का आले माहित नाहीपाहिले आजूबाजूलाशांतता होती सर्वत्रबसले थोडा वेळ निवांत तिथेअचानक कोणीतरी हाक मारलीआवाज ओळखीचा वाटलामी नजर वर … Continue reading भेटले जेव्हा त्याला

Love has no bounds

Loving anyone is our choice.Sadly, they are suppressing our voice. The constitution of this country gives us that right.Unfortunately, there's an arsenal of hatemongers ready to fight. They forced illegal lawsBrainwashed innocents.Religion is in danger,Such was their eloquence. To keep spitting venom,Is their highest duty.Hating others on the basis of religion,Such is their absurdity. Love … Continue reading Love has no bounds

इश्क़ और उत्पीड़न

मुझे भी शौक है इश्क़ में डूब कर इश्क़ के बारे में लिखने का,कभी तेरी ज़ुल्फे तो कभी तेरी पायल के बारे में लिखने का.. के तेरे पायल की खनक कैसे धड़काती है मेरे हृदय को?इस गुत्थी के रसायनशास्त्र के बारे में लिखने का...जब तक पाठक दीवाना ना हो जाए तेरा!! उस हद तक लिखने … Continue reading इश्क़ और उत्पीड़न

Pyaar – Ek Azaad Parinda

Na koi rokeNa koi tokeAisa  sansaar chahti huAzaad parinda hai yeh dilAzaad udhna chahti hu Kabhi giri bijli mujpeTo kabhi  raaste roka tufaan neTez hawa ne bhi rah bhatkana  chahaPar Azaad hai yeh dilNeele asaman me udhna chahta hai Basana tha jis shaak pe ghoslaAndhi  bhi wahi  girai  thiHosle se  tinka tinka jodhFir umeed banana … Continue reading Pyaar – Ek Azaad Parinda

एक स्वतंत्र मी

एक स्वतंत्र  पक्षी मी  उंच उडत राहणार आहेएक स्वतंत्र  ज्योत मी  लख्ख प्रकाशित करणार आहे एक स्वतंत्र श्वास मीशेवटपर्यंत घेणार  आहे  एक स्वतंत्र ध्यास मीकायम मनी जपणार आहे एक स्वतंत्र सूर्य मीउषःकाल करणार आहेएक स्वतंत्र चंद्र मीचांदणे शिपंत जाणार आहे एक स्वतंत्र  मशाल मीक्रांतिला प्रज्वलित करणार आहेएक स्वतंत्र वारा मीसळसळत वाहणार आहे एक स्वतंत्र व्यक्ती मीहक्कांसाठी लढणार आहेएक … Continue reading एक स्वतंत्र मी

Editorial Vol. V

This is the second year of Urooj, initiated in the year of the pandemic which proved a challenge and provided an opportunity. We wondered how we would manage the intense political discussions online but we did. The opportunity was that we were able to expand participation beyond Mumbra and have facilitators from across the city … Continue reading Editorial Vol. V

Mere desh ki awaam

मेरे देश की अवाम Mere desh ki awaam देश की अवाम आजकयुं परेशान हो रही हैहर उठने वाली आवाज़सलाखों में कयुं रो रही हैकिस गलती की सज़ा मिली जोज़िंदगी उनकी तंग हुई हैलगता है की सारी ताकतज़ालिमों संग हुई हैमां बिलकती रह गईबाप थक कर गिर गयाअपनों के लिए लडते लडते वोअपनों से जुदा हो … Continue reading Mere desh ki awaam

लिखूं तो क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आ रहा।

लिखूं तो क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आ रहा। कि लिखूं उस कलम के बारे में जो लोगों को न्याय देता है। कि लिखूं उस कलम के बारे में जो न्याय को छोड़कर अन्याय के लिए लिखता जा रहा है। लिखूं तो क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आ रहा। कि लिखूं उस उदार और उग्र … Continue reading लिखूं तो क्या लिखूं कुछ समझ नहीं आ रहा।

अभिव्यक्ति की आजादी एक मूल मानव अधिकार है|

अभिव्यक्ति की आजादी एक मूल मानव अधिकार है| कई देशो ने अपने नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी दी हैं, ताकि वे अपने विचारों को व्यक्त करके साझा कर सकें तथा विभिन्न मामलों पर अपनी राय दे सकें | अभिव्यक्ति की आजादी एक तर्कशील चर्चाओं को प्राथमिकता देती है, जो देश और समाज के विकास के … Continue reading अभिव्यक्ति की आजादी एक मूल मानव अधिकार है|

Ilzam tarashi se bachein, zimmedar shahri banein!!

Andekhi ek mazboot si, deewar banaye bethe hai,Apni zimmedariyon se, nazrein churaye bethe hai,Kashtiyan doob rahi hai desh ki, duniya ke Samandar meinHam ek dusre par ilzaam lagaye bethe hai, Jab zimmedariyon ki baat ho to zyadatar hamare zahen mein gharelu zimmedariyan hi aati hai lekin kya hamari zimmedari hamare gharon tak hi mehdood hai!Hamare … Continue reading Ilzam tarashi se bachein, zimmedar shahri banein!!

Vote Ek Zimmedari

Aaj hum baat kr rahe hai vote ki to vote se hume kya yaad aata hai? Ager hum apne aaspass dekhe to kachra, tuti sadke, bijli ki dikat, school na hona ,hospital se dur hum…….naukriya na honaa, traveling ka problem….kya humne kbhi socha hai q hume ye sab prob ho rahi hai? q hum apna … Continue reading Vote Ek Zimmedari

Dissent and Democracy

Article 19 of the Indian Constitution, gives all citizens the right to(a) to freedom of speech and expression;(b) to assemble peaceably and without arms;(c) to form associations or unions;(d) to move freely throughout the territory of India;(e) to reside and settle in any part of the territory of India;(g) to practise any profession, or to … Continue reading Dissent and Democracy

سماجک سوچ

بھارت کا ناگرک ہونے کے ناطے ہم سب کی ذمّہ داری بنتی ہے کہ ہم بھارت کے آئین پر عمل پیرا ہو۔لیکن آج کا ماحول اسکے بر عکس نظر آتا ہے۔ہم جنس،رنگ،مذہب،ذات پات وغیرہ۔ میں فرق کرتے ہیں۔اور دن رات ہم اس بات کو لیکر لڑتےجھگڑتے رہتے ہیں۔جس سے نا ہمارا فائدہ ہے نا ہمارے … Continue reading سماجک سوچ

दोस्ती में अमन

हमारे भारत की जम्हूरियत सबसे प्यारी है जहां पर अलग-अलग मजहब के अलग-अलग कल्चर के अलग-अलग जबाने बोलने वाले लोग आज़ाद वो अमन से रह सकते हैं। हमारी जम्हूरियत तीन पिल्लरों पर हैं।  पहले सांसद, दूसरा है न्यायालय, तीसरा सरकारी कर्मचारी और चौथा खुदसे मीडिया ने माना है।  मगर आज हम देखें संसद में ऐसे-ऐसे कानून  … Continue reading दोस्ती में अमन

AS A CITIZEN, WHAT DO YOU EXPECT FROM THE GOVERNMENT?

‘Expectation’. Big word. Expectation is a very personal concept. However when it comes to more important aspects like the public welfare and the society one lives in, expectations of most people are pretty similar. I do not write as a critique today. I write as a citizen. Because I, an Indian Muslim woman am a … Continue reading AS A CITIZEN, WHAT DO YOU EXPECT FROM THE GOVERNMENT?

LOVE JIHAD

Love Jihad or Romeo Jihad is an Islamophobic conspiracy theory alleging that Muslim men target women belonging to non-Muslim communities for conversion to Islam by feigning love. I think this is going to be the next issue and political agenda for next coming years because nowadays the BJP government and the party members are doing … Continue reading LOVE JIHAD

Reality of One Nation One Religion

Ever since the dawn of mankind there has always been a race for survival. Take extinction of Neanderthals (Homo neanderthalensis). Amongst the various Hypothesis on extinction of Neanderthals one of the thesis talks about a war between “Homo Sapiens & Homo Neanderthalensis” in the race of evolution. On the basis of that we can conclude … Continue reading Reality of One Nation One Religion

“ न्यायालय का आज का माहौल ”

न्यायालय का मतलब होता है लोगो के साथ  न्याय, लेकिन जब न्याय ही लोगो के साथ आन्याय करे तो लोगो का भरोसा उटने लगता है। जो आज के माहौल में दिखाई दे रहा है। अमीरों के लिए जल्दी न्याय और गरीबों के लिए देर में न्याय। आज के माहौल बहुत सी ऐसी घटनाएं हुई है। … Continue reading “ न्यायालय का आज का माहौल ”

कोरोना एक महामारी

कोरोना एक महामारीजिंदा रहने के लिए फासला जरूरी है,खुदा जाने अब क्या क्या जरूरी है महफिलों में तो बहुत रह चुके हैं ,अब बस घर मे रहना जरूरी है वबा निकली है अपने पूरे बंदोबस्त के साथ,एक साथ ना बैठो अगर जीना जरूरी है कोरोना (Covid-19) यह बिमारी एक महामारी का रूप ले ली।  किन्तु … Continue reading कोरोना एक महामारी

Freedom of expression. (Article 19)

Freedom of expression means no one can restrict citizen’s views or their rights of expression. For example we can publish articles, television by this person can express their views. But this right is not absolute. The citizen has right to freedom of speech and expression, liberty to propagate their views. Freedom of expression is among … Continue reading Freedom of expression. (Article 19)

EDITORIAL VOL. IV

Parcham wishes everyone an Inqualabi Women’s Day. It is 111 years since International Women’s Day was first celebrated, a victory of collectivization of women against the inhumane working conditions, the demand for voting rights. Since then every year, the celebrations mark women’s struggles for a more just and equal world. In India, the last year … Continue reading EDITORIAL VOL. IV

International Women’s Day 8th March’2020

औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा ।औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा ।औरतें उठी नहीं तो…….. जुल्म बढ़ता जाएगा ।आंतरराष्ट्रीय महिला दिन 8 मार्च 2020औरतें उठी तो…….. ज़माना बदलेगा ।औरतें उठी तो…….. ज़िदंगी खूबसूरत होगी | आज से 40 साल पहले भारत और महाराष्ट्र में महिला दिन की शुरुवात चंद्रपुर की यौन उत्पीड़नकी … Continue reading International Women’s Day 8th March’2020

HISTORY OF 8TH MARCH

Har saal 8th March ko International women’s day manaya jaata hai. Kya kabhi kisi ne socha hai ki women’s day kyu manaya jaata hai? aakir iski history kya hai? 1908 me hazaron aurton ne morcha nikala unke shoshan ke khilaaf, kaam ki jagah behtar banana ke liye, behtar tankha ke liye aur voting rights ke … Continue reading HISTORY OF 8TH MARCH

عورت

عورت صدیوں سے ہی تو چلا آرہا ہےوراثت میں ہم کو دیا جا رہا ہےکہ, اگر میں ایک لڑکی ہوںتو میں ایک غلام ہوںمیں وہ ہوں جسے بندشوں میں رہنا ہےہر ستم کو سہنا ہےہر وقت چپ رہنا ہےلجا ہی میرا گہنا ہےسہمی کھڑی یہ دیکھتی, اوردل ہی دل میں سوچتی کہکون ہو تم؟ کیا … Continue reading عورت

Badi Nek Azmat Hoti Hai Aurat…

Zami par Rehmat ki alamat hoti hai Aurat…Badi nek azmat hoti hai Aurat… Koi na hoga, na hota jahaan mein abhi tak,Zindagi ki zaroorat hoti hai Aurat… Jo paaye use, chhod de maal o daulat,Us shohar ki shohrat hoti hai Aurat… Jis ghar mein barasti ho Khushiyo ki mehfil,Us ghar ki barkat hoti hai Aurat… … Continue reading Badi Nek Azmat Hoti Hai Aurat…

Reformers for Women’s Rights

India is a country which has a very rich culture and historical heritage. It  has a  history of abuse & oppression of women. From Ancient times to 19th century women's condition deteriorated with time. Women generally considered low status and inferior to the men. They were considered second class citizens of society. Some documented events … Continue reading Reformers for Women’s Rights

फेमिनिज़्म (नारीवाद) –

नारीवाद के बारे में हर किसी ने सुना होगा पर कोई इसके मतलब को समझता नहीं और बिना समझे इसे एक गाली की तरह इस्तेमाल किया जाता है. आखिर ऐसा क्यों? अगर अपने हक़ के लिए लड़ना नारीवादी है तो हां हूँ मैं नारीवादी और मुझे खुद को एक नारीवादी कहने में न तो शर्म … Continue reading फेमिनिज़्म (नारीवाद) –

नारीवाद

थोड़ा भोली हु पर बेवकूफ तो नहीं हां मासूम भी हूँ पर नासमझ तो नहीं सबकी फिक्र रहती हे मुझे पर अपने हक़ से महरूम हरगिज़ नहीं हां थोड़ा अलग हु मैं तुमसे लेकिन कमज़ोर नही हूं मैं मज़बूत हूं इतनी के खुद के लिए लड सकुं बहुत हुई ये ज़ुल्म सितम की लड़ाई अब … Continue reading नारीवाद

हम हव्वा की बेटियां

वह हम को खोफ दिलाता है।कभी कोशिश कर समझाता है।तुम अपना सब कुछ गवा सकते हो।इस राह पर बुहत ही लाशें है। तुम पर कभी भी हो सकता है।हमला तो अक्सर होता रहता है।तुम ज़न हो, ज़न-ए- नाज़ुक सी ।तुम्हे किया जरूरत राह पर आने की? पर हम, हम हव्वा की बेटियां है।हमे जूनून ने … Continue reading हम हव्वा की बेटियां

Bint- E- Hauwa ki kahani

Bachpan se Suni humne bint e hauwa ki kahani,Kabhi Dadi, kabhi Nani, kabhi Amma ki zubani, Rani Laxmi bai se savitribai phule aur Fatima bi ki kahani,Jinhone di apno k liye har tarah ki qurbani, Aurat zaat ko hmesha se kamzor hi hai jaana,Yehi galti Jane anjane me humne hai kar Dali, Kbhi Maa, kbhi … Continue reading Bint- E- Hauwa ki kahani

ایک مسلمان عورت

ایک مسلمان عورت میں عورت, کیسی؟مسلمان عورتجو ڈھکی بھی ہے, بندھی بھی ہےپر حوصلوں پر ٹکی بھی ہےمیں عورت, مسلمان عورتمجھ میں پرواز بھی ہےجینے کا انداز بھی ہےمیں توڑ دوں بندش اور توڑتی بھی ہوںجو پسند نہیں آئے, اسے چھوڑتی بھی ہوںسیاہ چادر جو میری پہچان ہےکہاں کہتی ہوں, مجھے اس سے انکار ہےکیا … Continue reading ایک مسلمان عورت

آواز

آواز جب ہم نے اپنی آواز لوگوں کو سنانا چاہاتب لوگون نے ہماری زباں پر قفل لگانا چاہاغلط کو صحیح سوچ کر جیتے تھے ہمجھوٹ کو سچ مان کر جیتے تھے ہممردوں کو خوش دیکھ جیتے تھے ہمخود کو پردے میں رکھ کر جیتے تھے ہمکڑوے گھونٹ پی کر ہمیں خوش رہنا تھااپنی خوشی مار … Continue reading آواز

DOMESTIC VIOLENCE ACT

8th March, the day which is universally celebrated as women's day. Do we actually know why is 8th March declared as International Women's day. It is because a million women and even men rallied in support of women's rights for the first time on 8th March. In India, the first Women's right movement was led … Continue reading DOMESTIC VIOLENCE ACT

اختیار

اختیار یہ پہچان جو میری دکھائ دیتی ہےگزرے وقت میں مجھ پر کی گئزیادتیوں کی گواہی دیتی ہےصدیوں سے ایک بوجھ مجھ پر لادا گیا ہےنام تہذیب کا لے کر مجھ کو باندھا گیا ہےصنف نازک کا اسم جو مجھ کو دیاسنگ ایک قفس بھی تحفہ دیاملا ماحول گھٹن زدہ میں دب سی گئڈال خود … Continue reading اختیار

MUMBRA KE SHAHEEN BAGH KI AWAAZEN

Miss Aatika Shaikh, Fatima momin 1947 ko  hamara desh aazad hua. Kaha jaata hai ke hamein aazadi mil chuki hai aur hamare desh mein koi bhed bhao nahi hota phir bhi aaj musalmaanon ko hamare dekh se alag kiya jaraha hai. NRC ki wajah se sab musalmaa paresha hai. NRC ke against protest karne ke … Continue reading MUMBRA KE SHAHEEN BAGH KI AWAAZEN

Women’s in Constituent Assembly

When we talk about Indian constitution, The only name which comes in our mind is Dr B R Ambedkar. But he and his team worked together to form constitution. Do we know how many women were there in the constituent assembly? What was their contribution? What were the issues raised in the constituent assembly by … Continue reading Women’s in Constituent Assembly

Masabi Samaaj Ke Liye Humare Naujavan Ki Zimmedariya

Aurat, mahila, women aur jis bhi naam se hum unhe jante hain, Kya unka kaam sirf Bache paida krna, unki parvarish krna, ya gharelu kaamo ko dekhna hai ??? Kya unhe koi adhikar nhi apni soch, apni raay rakhne ka??? Unhe koi adhikar nhi apne huqooq mangne ka??? Dusro ki trf ishara nah krte hue … Continue reading Masabi Samaaj Ke Liye Humare Naujavan Ki Zimmedariya

Editorial Volume III

70 years ago today, India became a Republic adopting the Constitution prepared by a Committee of 299 members. The Constituent Assembly represented the diversity of India with members drawn from across the country to ensure regional representation as well as representation of people of different faiths, a testament to the spirit of inclusiveness and secular … Continue reading Editorial Volume III

!! نام میں کیا رکھا ہے

شیکسپیٸر نے کہا تھا”نام میں کیا رکھا ہے“۔ایک گلاب کو کوٸ سا بھی نام دے دیں وہ گلاب ہی رہیگا،اس کا رنگ روپ بدلے گا نہیں ۔بلکل اسی طرح ہمارے ملک کا بھی مختلف موقعوں کی اور واقعوں کی مناسبت سے مختلف  نام  پڑا۔  دریاۓسندھ کے مشرق میں واقع علاقہ کا نام عر ب تاریخ نگارو … Continue reading !! نام میں کیا رکھا ہے

A JOURNEY OF SELF REFLECTION

-KHAN ANAS ZAID I was born and raised in lower middle class Muslim family. My childhood was the period when Israel- Palestine war was hot issue that were discussed in communities. that community discussion gave me my first political ideology. in a war between Israel and Palestine I supported Palestine because they were Muslims and … Continue reading A JOURNEY OF SELF REFLECTION

INDIA : A COUNTRY RACING BACKWARDS

-ALBAN DALVI I , Alban Asif Dalvi, am an Indian, a Maharashtrian, a Muslim, a student and yet an individual. Likewise, we all have different names, religions, status, language, region etc., but despite of all that separators around us we still call ourselves INDIAN. As a responsible citizen of this country, I feel it is … Continue reading INDIA : A COUNTRY RACING BACKWARDS

THE IDEOLOGICAL BATTLE FOR AND AGAINST NRC

-MATEEN ANSARI A person can be a rightist or a leftist based on their  ideology. Right wing is characterized by an emphasis on "notions such as authority, hierarchy, order, duty, tradition, reaction & nationalism". Whereas left wing is characterized by an emphasis on ideas such as liberty, equality, fraternity, rights, progress, reform & internationalism. This … Continue reading THE IDEOLOGICAL BATTLE FOR AND AGAINST NRC

INDIA DOESN’T HAVE AN “OFFICIAL RELIGION” – A REMINDER!

-MUSKAAN SAYED After the Britishers invaded India, they managed to rule over us even though they were in a very small number. They used the policy of ‘Divide and Rule’, when the people started to demand participation in the governance hence they first pitched the people against each other by creating separate electorates (on the … Continue reading INDIA DOESN’T HAVE AN “OFFICIAL RELIGION” – A REMINDER!

MERI NAZAR SE DEKHO TO…..

-SAYED AQUIB KAMAL Ye hamare desh me ho Kya rha hai ?  Har taraf logo ka hujum hai, log apne saare  kaam kaaj chod kar,  students apni pdhai chod kar, protest kr rhe Hain,  aakhir kiyu????? Ek desh ki pehchan us me rehne wale logo/nagrikon se hoti hai,  hamare desh ki halat kch is trah … Continue reading MERI NAZAR SE DEKHO TO…..

ہم ایسا کچھ کرنا سیکھیں

-SHAIKH MANTASHA  ہمیں دیش دیتا ہے سب کچھ،ہم بھی تو کچھ دینا سیکھیں تھکے ہوٶں کو تپتی دوپہر میں، درخت سایہ دیتے ہیں   پھول خوشبو سدا دیتے ہیں اور ہم پھول کی مالا  اوروں کا بھی من ہے جس میں،ہم ایسا کچھ کرنا سیکھیں  دورِ حاضر میں ہم دیکھتے ہیں کہ ہر طرف فسادات،رنگ و نور … Continue reading ہم ایسا کچھ کرنا سیکھیں

HUM BHARAT KE NAGRIK KYA KAR SAKTE HAIN!!

-SALMA ANSARI Aaj hum Bharat ke nagrik ki baat kar rahe hai, matlab hum hamari baat kar rahe hain.  Sahi padha aapne aapki aur meri baat ho rahi hai, kyu ki hum hain bharat ke nagrik!! Ek bharat ka nagrik kya kar sakta hai ? Ya aise bol sakte hai, ek bharat ka nagrik kya … Continue reading HUM BHARAT KE NAGRIK KYA KAR SAKTE HAIN!!

DESH KI DASHA

POEM BY RABIYA SIDDIQUI Ye jo sadko pe,utar aye hain log. De ke kursi tumhe,pachtaye hai log. Achahe din ke Jhanse me Aake, pachtaye hai log. Jinki pahchan se Pahchan Pai Tumne. Unhi Ki pahchan Ko Kathagharo me laye ho Tum. Eakta, Akhandta ko Khand Karne Aye Ho Tum Suraksha,rozgar , Makan Ka Dikhakar Sapna … Continue reading DESH KI DASHA

KUCH HUWA TOH NAHI…

POEM BY ALBAN DALVI Agaaz e hukmrani mein baatein toh bohat hui thi, Magar kuch hua toh nahi… Asmaan mein jo garaj rahe hai woh badal hi hai na, Kahin dhua toh nahi… Insaaf ke liye jaan ki baazi lagani hongi? Laga denge, Khaandani riwaj hai koi aaj ka mudda toh nahi… Itni bedardi se … Continue reading KUCH HUWA TOH NAHI…

चिनार

POEM BY AQUILA KHAN तुझ पर हुए ज़ुल्म की, हर हद्द पार है, ऐ कश्मीर तेरे बुहत गुनेहगार है। तेरे नाम को जुर्म बनाया है। जो तुझ पर गर्व करते है। प्यार ना समझा जिनसे कभी वह अखंडता की बात करते है। पाखण्डी है वह मुजरिम है। जो जालिम हाकिम, हुकूमत करते है। लानत है, … Continue reading चिनार

HUM AUR WOH

POEM BY SAYED AQUIB KAMAL Hum ko hum, hum hi ne banaya,Hasad o nafrat ka beej humne khud hai lagaya,Auro se alag hamesha khud ko hai paaya,Khud un se duri humne hai banaya. Bachpan se humko sb ne hai sikhaya,Jo hamara hai use dusro se chupaya,Khilaune bhi apne nah bante kisi se,Phir bhi kusurwar humne … Continue reading HUM AUR WOH

Members of the constituent Assembly of India, Representing the diversity of the country!

O.V. AlagesanMrs. Ammu SwaminadhanM. Ananthasayanam AyyangarMoturi SatyanarayanaMrs. Dakshayani VelayudhanMrs. G. DurgabaiKala VenkataraoN. Gopalaswamy AyyangarD. Govinda DasRev. Jerome D'suuzaP. KakkanK. KamarajV.C. Kesava RaoT.T. KrishnamachariAlladi Krishnaswami AyyarL. Krishnaswami BharathiP. KunhiramanM. Thirumula RaoV.I. Muniswamy PillayM.A. Muthiah ChettiyarV. Nadimuthu PillaiS. NagappaP.L. Narasimha RajuB. Pattabhi SitaramayyaC. Perumalswamy ReddyT. PrakasamS.H. PraterRaja Swetachalapati Ramakrishna Renga Roa of BobbiliR.K. Shanmukham ChettiT.A. Ramalingam ChettiyyarRamanath … Continue reading Members of the constituent Assembly of India, Representing the diversity of the country!

Rap on Constitution

Rap Audio is available at this link https://drive.google.com/file/d/1uDbIS2b3w6BqCvp2M-PEJEu6PyJZgPxF/view?usp=sharing Aeh.. Constitution.. Samvidhan.. Kaafi din se man mein mujhko sawaal ek kha raha hai Kya hua yeh desh ko yeh kis disha mein ja raha hai Haq ki iss ladaai mein garibi maar kha raha hai Kya sach mein andha kanoon ya fir dekhna nahi chahta hai … Continue reading Rap on Constitution

رابعہ فاطمہ کے سوالوں کی ریل گاڑی

یک دفعہ کی بات ہے،ایک استاد کلاس میں بچّوں کو جمہوریت کے متعلق کچھ معلومات دے رہے تھے-انھوں نے بچّوں سے آزادی،مساوات،انصاف،اور برادری (ذات پات) کے متعلق چند سوالات کیے-سب بچّوں نے کچھ نہ کچھ جوابات دیے۔لیکن کچھ بچّوں کی تو عادت ہی ہوتی ہے کہ وہ آسان سے سوالات کے جوابات استاد سے درکار … Continue reading رابعہ فاطمہ کے سوالوں کی ریل گاڑی

We The People of India

National register of citizen (NRC or NRIC) is a register maintained by the government of India, which contains the names and identification of Indian citizens. This register was prepared in 1951 after census of 1951. Since then it is not updated. Indian State Assam is a very first state to update NRC in order to … Continue reading We The People of India

مسلمان قوم اور سچر رپورٹ

خدا نے آج تک اس قوم کی حالت نہیں بدلی  نہ ہو جس کو خیال آپ اپنی حالت کے بدلنے کا مسلمان جو آجکل سب کی نظروں میں گر گیا ہے ،کہیں اگر دہشت گرد حملے ہوں،قتل و گارتگری ہو،کوئی قانون توڑنا ہو ،گندگی پھیلانا، زیادہ بچے پیدا کرنا ۔ان سب میں سب سے پہلے … Continue reading مسلمان قوم اور سچر رپورٹ

Dropouts – What needs to be done?

“What is really needed to make democracy function is not knowledge of facts, but right to education” -Mohandas Karamchand Gandhi The parliament passed the Right of children to free and compulsory education act or Right to education act on 4 August 2009. Even though education is important there are large number of dropouts in schools. … Continue reading Dropouts – What needs to be done?

Who Is Responsible For The Mumbra We Want?

Mumbra is a small suburb of Thane district and falls under the administrative preview of Thane Municipal Corporation (TMC). It is sandwiched between the creek on one side and the Sahadri range on the other.  In the early 17th century Mumbra was a small village of Fishermen tribes (Koli and Agri) with a shipbuilding centre. … Continue reading Who Is Responsible For The Mumbra We Want?

Mahilayein aur Rajneeti

Constitution ke 73rd aur 74th amendment, article (243D) ke hisaab se mahilaon ke lie aarakshit seeton kee kul sankhya ka ek-tihaee (1/3) hai. SC aur ST ke lie aarakshit seeton ka ek-tihaee (1/3) bhee mahilaon ke lie aarakshit hai. sabhee levels par adhyakshon ke ek tihaee kaaryaalay mahilaon ke lie aarakshit hain. Maharashtra government ne … Continue reading Mahilayein aur Rajneeti

داستان بی بی اشراف

DAASTAN-E-BI BI ASHRAF داستان بی بی اشراف Jahalat ke zamane ki hai ye baat Taalim par tha jahan mardon ka raaj De kar hamein niswaniyat ka naam Rakhte the jo khud ke saron par taaj Bandishein lagai tum ne beja sabhi Mujhe insan ke saf mein na rakha kabhi Lafzon ka sailab tha zahen mein … Continue reading داستان بی بی اشراف

आज़ाद.ए.हिन्द

आज़ाद.ए.हिन्द Aazad-E-hind आज़ाद.ए.हिन्द की कहानी तो याद होगी|लडे जो,वह बाग़ी उनकी कहानी तो याद होगी | 1857 से शुरू हूआ था, अंग्रेजो का ज़वाल |याद होगा, मंगल पण्डे और शाह ज़फर का जलाल| लडे जो आज़ादी.ए वतन के लिए,उनकी फेहरिस्त तवील है |तारीख के पन्नो में उनकी पुख्ता दलील है | कैसे नाम लिख दूं, … Continue reading आज़ाद.ए.हिन्द

विविधता में एकता

विविधता में एकता Vividhta mein Ekta Kaun kehta hai bharat ek sampurn prabhutva sampatra samajwaadi dharmnirpeksha gannrajya hai Phir bhi ladte hai log hindu-muslim ke naam par Yeh niyam samvidhan ki kitaab mein toh diye hai Neeji zindagi mein toh rajneeti dal kuch aur hi hai Aaj bhi karte hai log dange mandir-masjid ke naam par Khun … Continue reading विविधता में एकता

آئین ہند

Aayen-E-Hind ki sadiyon tak hukumat gairo ne, kuch angrezo ne kuch purtagizo nehamein uljhaye rakha samaji-O-mazhabi aqeedo mein ki bohot koshishein hamne mazhabi-O-samaji aqaayed mein bat kar gandhi ji ki satyagrah se, musalmano ki tahreek-E-khilafat ko lekar ek tahreek jo hui barpa, aazadi ke naam pe saare muttahid hue azhabi-O-siyasi masaayel se pare hoke ukhad … Continue reading آئین ہند

मै भारत का संविधान हू

मै भारत का संविधान हू MEIN BHARAT KA SAMVIDHAN HOON सुना है भारतीयो का अभिमान हू मै संविधान हूमै एकता ,अखण्डता  न्याय का सम्मान  हू धर्म, जाति, वेषभूषा अनेकता मे एकता का सूत्रधार हू मै संविधान हू मेरा कोई  आकार नही मैं सब मे निहितनिरंकार हू मै संविधान हू हा, एक  बात है जो मैं कहना … Continue reading मै भारत का संविधान हू

Editorial Vol. II

70 years ago today, a document detailing the principles to govern this Country was submitted by the Constituent Assembly. This document reflected the hopes and aspirations for a country whose freedom had required martyrdom and a long struggle against imperialism. The right to govern ourselves had been a hard fought battle and so the making … Continue reading Editorial Vol. II

Baccho ke vikas mein maidan bhi hai ahem

Ghar ke baad agar bacche kahin sabse zyada waqt guzaarte hai toh woh hai school. Lekin jab school ka naam lete hai to dimaag mein aata hai, classroom, teachers, kitaabein, aur exams. Kisi ke bhi khayaal mein khel nahi aata hai. Jab hum baccho ke bhavishya ki baat karte hai toh padhai hi zaruri hoti … Continue reading Baccho ke vikas mein maidan bhi hai ahem

Football aur meri kahani…

sports ko leke jaise hi ladkiyo ki baat aati hai to  koi sochta hi nahi, ki ladkiyo ko bhi sports khelna chahiye. Sports hamare zindagi ke liye kitna important hai, ladkiyo ke liye ek age limit hoti hai.jab woh choti hai to tab khel sakti hai or jab badi ho jaati hai to unko khel … Continue reading Football aur meri kahani…

Is Social Media fueling Intolerance?

According to Council of Europe, a leading human rights organization, “Intolerance is a lack of respect for practices or beliefs other than one's own. It also involves the rejection of people whom we perceive as different, for example members of a social or ethnic group other than ours, or people who are different in political … Continue reading Is Social Media fueling Intolerance?

KINKE HAATHO MEIN HAI DESH KA BHAVISHYA

Kaise Hone chahiye hamare teachers Aaj ki padhai mein aur pehle ki padhai mein bohot zyada farq hai. ye farq kuch students ki wajah se hai aur zyadatar kuch teachers ki wajah se bhi hai. jinhe zimmedaari hai bacchon ko padhane ki,Teachers bas iss baat par dhyaan dete hai ki hamara portion complete ho jaaye. … Continue reading KINKE HAATHO MEIN HAI DESH KA BHAVISHYA

کیا آپ محفوظ جگہ رہتے ہیں؟؟؟

بڑھتی ہوٸ آبادی کے تحت ممبرا میں بلڈنگیں کثیر تعداد میں پاٸ جاتی ہیں۔لیکن اگر ہم ان بلڈنگوں کا نقشہ دیکھیں تو ہمیں اندازہ ہوگا کہ بہت کم ہی بلڈنگیں صحیح طرز سے تعمیر کی گٸ ہیں۔اس کے برعکس کافی مقدار  میں بلڈنگیں غیر محفوظ ہیں انکو مظبوطی سے نہیں بنایا جاتا،داخلی دروازہ اتنا تنگ … Continue reading کیا آپ محفوظ جگہ رہتے ہیں؟؟؟

ELECTRICITY WOES IN MUMBRA

Load Shedding  Blackout for hours is an everyday experience for people living in Mumbra. The demand for more electricity leads to the load shedding in order to balance the equation of the power allotted and the power consumed. Load shedding is carried out according to the load curve.  This is divided into two parts, “Peak … Continue reading ELECTRICITY WOES IN MUMBRA

उरूज के बारे में

हम भारत के लोग, हम दुनिया की सबसे बड़ी जमूरीयत है । अगर हम सब से बड़ी जमूरीयत है तो क्या हमने जमूरीयत के उसूलों को अपनी ज़िन्दगी में ढाल लिया है? भारत का आइन हमें इस देश को आगे ले जाने का रास्ता दिखता है। इस आइन ने मुमकिन किया है कि अफसर, नेता … Continue reading उरूज के बारे में