दोस्ती में अमन

हमारे भारत की जम्हूरियत सबसे प्यारी है जहां पर अलग-अलग मजहब के अलग-अलग कल्चर के अलग-अलग जबाने बोलने वाले लोग आज़ाद वो अमन से रह सकते हैं। हमारी जम्हूरियत तीन पिल्लरों पर हैं।  पहले सांसद, दूसरा है न्यायालय, तीसरा सरकारी कर्मचारी और चौथा खुदसे मीडिया ने माना है। 

मगर आज हम देखें संसद में ऐसे-ऐसे कानून  लाये जा रहे हैं जिससे लोगों पर नाइंसाफी व गरीबी का ज़ुल्म होता है।  जैसे प्राइवेटाइजेशन देखा जाए या किसानों के खिलाफ कानून हो या कोई ऐसा कानून जो किसी मजहब के किसी फिरके के खिलाफ हो। वह भी देखने को मिलता है ऐसे कानून जो बिना संसद में डिस्कस किए हुए हम पर थोप दिया जाता है और हम कुछ कर नहीं पाते हैं।

हम छोटे-छोटे तबकों में, जाती में, बटे हुए हैं और नेता इसका भरपूर फायदा उठाते हैं।  उन्हें पता है इन्हें मजहब में फसाया जाए, उसका फायदा उठाया जाए लड़ाया जाए नफरत पैदा किया जाए तो यह कुछ नहीं कर सकते हैं।  दरअसल इसमें हमारी भी गलती है।  हम लोग आपस में बटे हुए।  कोई मजहब के नाम पर, तो कोई भाषा के नाम पर, तो कोई जात पात के नाम पे। 

सभी गलती नेताओं की नहीं है।  इसमें दरअसल हमने भी खुद से माना है कि हमें प्यार मोहब्बत दोस्ती नहीं रखनी है।    हमारी आदत ही ऐसी है हम एक दूसरे से मिलते जुलते नहीं है।  हम बरसों से बटे जा रहे हैं हमें हमारे नफरत की सबसे बड़ी है यह है कि हम एक दूसरे को समझना समझते नहीं है।  एक दूसरे के मोहल्ले में नहीं आते जाते कि हमने एक दूसरे से दूर ही रहने की ठानि ली है।  कि भाई तुम हिंदू हो अलग रहो तो मुसलमान हो अलग रहो।   किसी को किसी से लेना देना नहीं है।  हमें चाहिए कि हम एक दूसरे से मिले, एक दूसरे को जाने।  उनके कल्चर में जाए उनको अपना कल्चर बताएं।  उन्हें बताएं कि हम भारत के लोग हैं हम सब आपस में भाई बहन मिल कर रहे। एक दूसरे के सुख में दुख में शामिल हो ताकि जो हमारे बीच के नफरत है,  कम हो जाए, जो गलतफहमी है वह दूर हो सके और हम मिलकर अपने भारत को उन्नति की ओर ले जाएं।  जब किसी के ऊपर कोई ज़ुल्म हो, ज्यादती हो, तो हम मिलकर उसका साथ दें।  उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर रहे।

इसी तरह मैं और मेरे और मेरे दोस्तों का मिसाल देना चाहता हूं पिछले दो सालों से हम साथ रह रहे हैं और कुछ आठ महीनों से एक ही घर में रहते हैं।  हमारे लिए मजहबी कल्चर प्यार बांटने का जरिया बनता है।   ईद दिवाली हम मिलकर सेलिब्रेट करते हैं और अंबेडकर जयंती भी बड़े प्यार से मनाते हैं।  आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मेरे दो दोस्तों में एक हिंदू है और दूसरा बौद्ध हैं मगर हमें कभी ऐसा महसूस नहीं कि मुझे हिंदू से तकलीफ है कि मुझे बौद्ध से तकलीफ है या उन्हें मुझसे।  हम एक दूसरे के मजहब की रिस्पेक्ट करते हैं और बड़े सम्मान से इज्जत से रहते हैं क्योंकि हम भारत के लोग हैं।

Introduction:

My Name is Shakir Husain
IMZ:- Ishq Mohabbat Zindabaad
Poetry and
Travelling
Consultant-Community Organizer in Pani Haq Samiti.
कार्यकर्ता सेन्टर फ़ॉर फ्रोमोटिंग डेमोक्रेसी

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